10/08/2021

ज़िन्दगी का सफर

 


ज़िन्दगी का सफर 

माँ की कोख से जन्म लेकर शुरू हुआ "ये ज़िन्दगी का सफर",

    एहसान कुदरत का जो इंसान के रूप में बख्शा ये सफर...

जगत में आते ही खुशियों से गूंज उठा ये चमन, 

    जग हँसे हम रोये ये कैसा सफर...

बचपन बिता माँ की ममता की छाँव में, 

    किसीसे न बिछड़े ये ममता का प्यार भरा सफर...

माता-पिता के संस्कार, गुरु के ज्ञान ने काबिल बनाया, 

    तय किया ज़िन्दगी में मुकाम हासिल करने का सफर...

नटखट, मासूमियत, अपनों के साथ, मित्रो के संग बीतता गया ये "बचपन का सफर",

    पता नहीं चला कब जवानी की देहलीज पे रखा कदम...

आई जवानी कुछ ज्यादा सुहाना लगने लगा जवानी का सफर,

    बंधे जो हमसफ़र के संग, लगने  लगा कभी ख़त्म न हो ये उल्फत का सफर...

माता-पिता बनते ही ज़िन्दगी ने फिर दोहराया "बचपन का सफर",

    संतान में दिखा हर बचपन का वो सफर...

जिम्मेदारियां, व्यस्तता और कुछ मुकाम हासिल करने में पता नहीं चला कहा गुजर गया ये "जवानी का सफर", 

    अधेड़ पहुँचते ही फिर दोहराने लगा पुरानी, अनगिनत सुहानी "यादों का सफर"...

अनमोल यादों से ही हँसी लगता है "वर्तमान जीवन का सफर",

    वक्त गुजरता गया, गुजर रहा है,

    साँसे रुक जाती है, वक्त कभी रुकता नहीं...

सफर ज़िन्दगी का बहुत लम्बा है,

    मुश्केलियाँ जरुरी सफर में - तभी तो हरदम कुछ नया शिखाता गया ये "ज़िन्दगी का सफर"...

चुनौतियां, संघर्ष, मुश्किलें, मायूसी, कभी ख़ुशी-कभी गम, तन्हाईयाँ, कुछ वादे, एक वचन, शिकवा, आकांक्षा, उम्मीद, भरोसा, मित्रता, जिम्मेदारियां, उत्सुकता, उदारता, डर-निडरता, धैर्य, कुशलता, चाहत, दीवानगी, साहस, नफा-नुकशान, होनी-अनहोनी, क्रोध, ईषा, लालच, बुराई, एहसास, अनुभव, प्रेरणा, प्यार-मोहब्बत जैसे कई खट्टे-मीठे तत्थों से भरा ये "ज़िन्दगी का सफर"...

तजुर्बा "ज़िन्दगी के सफर" का जितना हुआ, बयां किया उतना कलम से,

    नज़रिया ज़िन्दगी देखने का सबका अपना-अपना...

दिल की नजर से दुनिया देखने से लगती है हँसी, सफर क्यों न हो लम्बा ज़िन्दगी का...

चाहत से उम्मीद से कटता है हरपल ज़िन्दगी का, ये ज़िन्दगी फिर भी यहाँ खूबसूरत है...

बस में नहीं किसीके, न कोई जानता कहा मुकम्मल होगा ये "ज़िन्दगी का सफर",

    कुदरत ही तय करेगा ज़िन्दगी के सफर का आखरी मुकाम...

"ज़िन्दगी का सफर" मेरी नज़र से...

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