7/30/2022

खूबसूरत

खूबसूरत

"खूबसूरत" सुनते, देखते या सोचते ही क्यू लगने लगता है हर लम्हा "खूबसूरत"? छा जाती है चहरे पे रोनक! हो जाता है मन प्रफुल्लित! जिसे देख सुकून मिलता है दिल को.....

        बात चाहे दिल की हो या कुदरत के अनोखे सर्जन की....

उगते सूरज की किरणों ने रोज जताई नई उम्मीद "खूबसूरत" जीवन की.....  

ढलते सूरज ने बदला "खूबसूरत" रंग हर पल आकाश का,जीवन ने ली करवट उम्र के हिसाब से....

    कुदरत ने बिखेरी अपनी "खूबसूरती" हर जगह...

    

 चाहे वो गर्मी से तपता रेगिस्तान हो...

फूलों, पेड़ो, बर्फीले चादर लपेटे पर्वत से सजी हसीं वादिया हो.....        

चांद, तारों से सजा आकाश हो...

"खूबसूरत" लहेरों ने कहा..." सुख दुख आते जाते रहेंगे जीवन मे मेरी तरह, कर्म जैसे तू करते चला"।

सागर ने पूछा दिल से.."ए दिल तू क्यूं न बना"खूबसूरत" मुजसे गहेरा जो ठहरा"...

रंगबिरंगी "खूबसूरत" मुस्कुराते फूलों ने कहा..."खूबसूरत" बनाना पड़ेगा खुदको दिलसे मेरी तरह,तभी लगेगी जिंदगी "खूबसूरत",

        तन्हा न कटेगा यूंही ये लंबा सफर जिंदगी का, बेरुखा लगेगा हर पल...

"चार दिनों का सफर नहीं तुम्हारा मेरी तरह "... एक फूलों के गुलदस्ते ने जो कहा 💐

        कुदरत की बाहों मे न जाने कितने ऐसे"खूबसूरत" नजारे सिमटे पड़े...

जीवन की राहों मे... 

कभी बचपन की यादों ने,

कभी मित्रों के साथ बिताए लम्हों ने, 

कभी अपनो के संग पाई खुशियों ने बनाया जीवन "खूबसूरत"...

        शुक्र कुदरत का जो बख्शा "खूबसूरत" जीवन मनुष्य अवतार मे...

       एक "खूबसूरत" कोशिश. ... मेरी नजर से.....

7/13/2022

एक रुका हुआ फैसला

"एक रुका हुआ फैसला"



बात उन दिनों की है जब सोने की क़ीमत करीब १५०,२०० रू प्रति १०ग्राम और जमीन की क़ीमत करीब ४०० रू प्रति बीघा हुआ करती थी l एक गांव में दादीजीने अपनी मेहनत से कमाए हुए धन से करीब छह बीघा जमीन खरीदी l जमीन मालिकी के सारे दस्तावेज़ अपने नाम कानूनन करवाए l बरसो बीत गए, जमीन वैसीकी वैसी पड़ी रही l
उम्र बढ़ते नादूरस्त तबीयत की वजह से दादीजिका निधन हो गया l जमीन मालिकी के सारे हक उनके सारे बच्चों के नाम कानूनन  दाखिल हो गए l बच्चे सब बड़े हो गए l सब अपने घरसंसार में व्यस्त हो गए l सब जमीन से काफी दूर रहते थे, पर जमीन वेरा पोस्ट जरिए जमा करते रहते थे l

एक समय ऐसा आया जब जमीन की क़ीमत आसमां छू ने लगी l उसी दौरान उसी गांव की एक औरतने (भूमाफिया कहना उचित होगा) जो देशकी अंधी कानून प्रणाली से अच्छी तरह वाकेफ थी, उसने उस जमीन पर बीना इजाजत, बीना शर्त, बीना किसी करार खेती करना चालू कर दिया और जमीन पे अपना हक जताने का जमीन मालिकों पर मुकद्दमा दाखिल कर दिया l
मुकद्दमा दाखिल होते ही कुछ ही दिनों में जमीनमालिको ने कोर्ट मे जमीनमालिकी के सारे दस्तावेज पेश किए l जिसमे जमीन खरीदी के दस्तावेज, सालों से भरी वेरा रसीद, कई सारे ठोस सबूत करीब १०८ पेश किए l
मुकद्दमा दाखिल होने के कई साल तक सिर्फ"तारिख पे तारीख"पड़ती रही l जमीन मालिकों ने कोर्ट के सारे नियम तहत हर

 कार्यवाही के दिन हाजरी देते रहे l

पर देश के अंधे कानून को कई साल तक पेश किए गए किसीभी सबूत को पढ़ने की फुर्सत नहीं मिली l कानून को कई साल तक सिर्फ "तारिख पे तारीख"देते रहना ही उचित लगा l
एक मुकद्दमा जिसमे न कोई अपना हक साबित करने का कानूनी सबूत, जमीन खरीदी से आज तक किसीभी दस्तावेज में या सरकारी रिकॉर्ड मे या ग्रामपंचायत मे मुकद्दमा

 दाखिल करनेवाले का कोई नामोनिशा नहीं फिरभी देश का अंधा कानून ऐसे भूमाफियाओको कितनी सुविधाएं प्रदान करता है वो आगे पढ़िए ..... 

देश के अंधे कानून ने मुकद्दमा करने वाले भूमाफिया को हर मुमकिन छुट (अपनी और से सबूत पेश करने की) पुरेपुरी सुविधाएं करीब ८,१० साल प्रदान किये l भूमाफिया हर बार किसी न किसी तरह अंधा कानून का फायदा उठाकर कोर्ट की कार्यवाही को आगे घसीटता गया l वो हर वख्त किसी न किसी तरह जमीनमालिकों से जुगाड करनेके लिए (जमीन पे कब्जा करके) अपना हिस्सा पाकर मुकद्दमा निपटाने की कोशिश मे लगा रहा, पर जमीनमालिको ने कोर्टकी कार्यवाही का इंतजार करना और जरूरी इंसाफ पाना उचित समझा l 
समय बीतता गया, तारिख पे तारीख पड़ती रही l कोर्ट कार्यकाल के बीच करीब ३ जज साहब का तबादला हो गया l हर आनेवाले विद्वान नया जज साहब को केस समझ ने मे ३, ४साल लग गए l कोर्ट की कार्यवाही सिर्फ आम आदमी का समय बर्बाद करने के लिए हैं वैसा साबित हुआ l कार्यवाही बिलकुल न के बराबर चलती रही l भूमाफिया द्वारा पेश किए गए कई गवाह कोर्ट ने खारिज भी कर दिया l 
समय बीतता गया, उस दौरान धीरे धीरे कई जमीनमालिको का निधन हो गया l उनके वरसागत हकदार के नाम भी दाखिल होते गए l 
इस मुकद्दमे के करीब सत्रह साल बीत गए l 
देश का अंधा कानून अपनी छत्र छाया मे पल रहे ऐसे भूमाफियाओ को अपना पक्ष रखने को और कितना समय देगी ये भी पता नहीं l 
देशमे किस तरह की अंधी कानून प्रणाली है, जहां एक ओर पेश किए गए "१०८"सबूत कम और भूमाफिया द्वारा पेश किए गए बीना सबूत का मुकद्दमा कार्यवाही को अनगिनत साल तक घसीटने में कामयाब???
क्या कानून को जमीनमालिको का अमूल्य समय, अनगिनत साल, कोर्ट कचेरी की दौड़भभाग,धन की बर्बादी से कोई मतलब नहीं??
सिर्फ तारिख पे तारीख देते रहना कितना उचित??
क्यू इंसाफ मे इतनी देर लगती है??
कानूनकी इस तरह की अंधी न्याय प्रणाली से भूमाफियाओं को कितना फायदा?
क्या कानून के ऐसे रवैया की वजह से निर्दोष कई लोग कानूनको अपने हाथों मे लेने के लिए मजबूर नही हो रहे?
क्यू ऐसे दोषी भूमाफियाओं के प्रति कोई कड़े नियम, कड़ी सजा का प्रावधान्य नही?
सरकारी कर्मचारी की भूमाफियाओं के साठ गांठ से देश के "नेताजी को"कितना फायदा?
या कोई ठोस कानून बनने से नेताजी को खुद को नुकसान का डर?
कोर्ट का कार्यकाल साल के ३६५ दिनों मे से सिर्फ २१० दिन कितना उचित?
कार्यवही मे कई दिन सिर्फ "मूंह दिखाने के लिए" बुलाना कितना उचित?
कई दिन विद्वान जज साहब गायब!
ये सब न्याय प्रणाली के लिए कितने अहम या विलंब की वजह तो नही?
हमेशा गुंडे, मवाली, असामाजिक तत्वों, सेलेब्रिटी,साधुबावा,नेताजी के खुदके मुकद्दमे, जिसकी सरकार उसके विरोध पक्ष के नेताओं के खिलाफ चल रहे मुकद्दमे,अब तो हर ३,५ दिनों मे देश मे कही न कही अपने राजकीय लाभ के लिए हो रहे (करवाये जा रहे) दंगे, पुरे साल मे ३,४ महीना चुनाव _उप चुनाव मे "मस्त, व्यस्त और तत्पर"रहती सरकारके पास आम आदमी के लिए मुकद्दमे लडने या उसे समय पर इंसाफ दिलाने मे कोई दिलचस्पी नहीं!

"देश हर क्षेत्र मे आगे बढ़ रहा है"का दावा करने वाली हर नई सरकार आम आदमी को समय पर इंसाफ दिलाने मे पीछे क्यूं??
आधुनिक टेक्नोलॉजी के बावजूद न्याय मे कई साल क्यूं लग जाते?
देशकी कानून व्यवस्था आम आदमी के लिए कितनी बदतर होती जा रही है ये आंकड़ों से अंदाजा लगेगा.........
देश मे करीब ५ करोड मुकद्दमे इंसाफ की राह देख रहे, दो साल मे करीब २० फीसदी का इजाफा!
अगर जमीनमालिक सालों की यातनाओं के बाद मुकद्दमा जीत भी जाता हैं तो भी देश का अंधा कानून दोषी भूमाफिया के खिलाफ कोई ठोस सजा या जुर्माना का प्रावधान्य नही l
ऐसे भूमाफिया जिसकी नियत "सिर्फ और सिर्फ" मुफ़्त मे हड़पना (सरकारी,कानूनी सुविधाओं की बदौलत) होती है उसे सजा या जुर्माना वसूली के लिए आपको और अनगिनत साल कोर्ट मे लडना पड़ेगा, ऐसा अंधा कानून?
" एक रुका हुआ फैसला" की तरह देश मे कई (करोड) मुकद्दमे चल रहे, उन में से कई मुकद्दमों मे बीना वजह, बीना सबूत निर्दोषोको कई साल कोर्ट मे घसीटने का काम और दोषियोको हर मुमकिन सुविधाएं प्रदान करने का काम देश का अंधा कानून कर रही है l 
कोई इंसाफ के लिए बेताब..... ....
कोई धन प्राप्ति के लिए बेताब.........
कोई कोर्ट कचेरी की लंबी कार्यवाही से मुक्ति पानेको बेताब........
कोई देश की अंधी न्याय प्रणाली का फायदा ले कर खुले आम " लूट चलाने को बेताब"..... 

ऐसे सारे चक्रव्यूह मे फंसा..............
"एक रुका हुआ फैसला_छह बीघा जमीन"
मेरी नजर से.......
(देश की अंधी कानून प्रणाली से पीड़ित, तजुर्बेदार एक जमीनमालिक)

7/06/2022

मैं बरसात

 मैं बरसात

ढोल नगाड़े से स्वागत किया बिजली ने मेरा,

        उमड घुमड़ कर पानी बरसाने आया,                     

                                                            मैं बरसात... 

कभी धूप कभी छांव की लुका छिपी खेले सूरज मेरे बादलों संग,

        कभी घने बादलों ने मेरे सूरज को लिया अपनी आगोश में,

कभी बौछार बनकर,कभी बूंद बनकर कुदरत से रुबरु कराने आया, 

                                                            मैं बरसात... 

मोर नाचे वन में,मन के मयूरा को प्रसन्न करने आया,

        कभी मोर की टहुंकार,कभी मेडक की आवाज़,कभी रिमझिम,कभी टिप टिप जल तरंग सुनाने आया,                                                                        

                                                            मैं बरसात......

कभी कागज की कश्ती से बचपन की शेर कराने आया,तो कभी बरसात से भीगे तन में बचपन समाया,

"कभी कीचड़ में फिसलना, कभी दूसरो के फिसलने से हंसना,कभी पानी में कूदकर" छब छबा छब" करना, कभी एक छाते में दो तीन दोस्तों को भिगोने से बचाने की कोशिश करना, कभी छाता उल्टा हो जाना, कभी छाता आकार के मशरूम खोजना,कभी बारिश के कारण स्कूल में छुट्टी का इंतजार करना, कई सारी यादें ताजा कराने आया,                                                                

                                                            मैं बरसात.....

कहीं आफत बनकर जलप्रलय का कहर बरसाया, तो कहीं सूखी बंजर ज़मीन पे हरियाली लाया, कहीं खेतों में अन्न की बुवाई लाया, 

                                                            मैं बरसात.....

हरीभरी सौगाते लाया, त्योंहारो की बारात लाया,पूजा अर्चना का सौभाग्य लाया, सब जीव का जीवन स्तोत्र बना,                                                                    

                                                            मैं बरसात..... 

मेरी नजर से....

भीगा रे मन मेरा आज

भीगा रे मन मेरा आज              रिमझिम बरसता बारिश,                        छम छम तरंग सुनाती बूंदो ने,            तन मन को भिगोया,          ...