खूबसूरत
"खूबसूरत" सुनते, देखते या सोचते ही क्यू लगने लगता है हर लम्हा "खूबसूरत"? छा जाती है चहरे पे रोनक! हो जाता है मन प्रफुल्लित! जिसे देख सुकून मिलता है दिल को.....
बात चाहे दिल की हो या कुदरत के अनोखे सर्जन की....
उगते सूरज की किरणों ने रोज जताई नई उम्मीद "खूबसूरत" जीवन की.....
कुदरत ने बिखेरी अपनी "खूबसूरती" हर जगह...
फूलों, पेड़ो, बर्फीले चादर लपेटे पर्वत से सजी हसीं वादिया हो.....
"खूबसूरत" लहेरों ने कहा..." सुख दुख आते जाते रहेंगे जीवन मे मेरी तरह, कर्म जैसे तू करते चला"।
सागर ने पूछा दिल से.."ए दिल तू क्यूं न बना"खूबसूरत" मुजसे गहेरा जो ठहरा"...
रंगबिरंगी "खूबसूरत" मुस्कुराते फूलों ने कहा..."खूबसूरत" बनाना पड़ेगा खुदको दिलसे मेरी तरह,तभी लगेगी जिंदगी "खूबसूरत",
तन्हा न कटेगा यूंही ये लंबा सफर जिंदगी का, बेरुखा लगेगा हर पल...
"चार दिनों का सफर नहीं तुम्हारा मेरी तरह "... एक फूलों के गुलदस्ते ने जो कहा 💐
कुदरत की बाहों मे न जाने कितने ऐसे"खूबसूरत" नजारे सिमटे पड़े...
जीवन की राहों मे...
कभी मित्रों के साथ बिताए लम्हों ने,
कभी अपनो के संग पाई खुशियों ने बनाया जीवन "खूबसूरत"...
शुक्र कुदरत का जो बख्शा "खूबसूरत" जीवन मनुष्य अवतार मे...
एक "खूबसूरत" कोशिश. ... मेरी नजर से.....











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