मैं बरसात
ढोल नगाड़े से स्वागत किया बिजली ने मेरा,
उमड घुमड़ कर पानी बरसाने आया,
मैं बरसात...
कभी धूप कभी छांव की लुका छिपी खेले सूरज मेरे बादलों संग,
कभी घने बादलों ने मेरे सूरज को लिया अपनी आगोश में,
कभी बौछार बनकर,कभी बूंद बनकर कुदरत से रुबरु कराने आया,
मैं बरसात...
मोर नाचे वन में,मन के मयूरा को प्रसन्न करने आया,
कभी मोर की टहुंकार,कभी मेडक की आवाज़,कभी रिमझिम,कभी टिप टिप जल तरंग सुनाने आया,
मैं बरसात......
कभी कागज की कश्ती से बचपन की शेर कराने आया,तो कभी बरसात से भीगे तन में बचपन समाया,
"कभी कीचड़ में फिसलना, कभी दूसरो के फिसलने से हंसना,कभी पानी में कूदकर" छब छबा छब" करना, कभी एक छाते में दो तीन दोस्तों को भिगोने से बचाने की कोशिश करना, कभी छाता उल्टा हो जाना, कभी छाता आकार के मशरूम खोजना,कभी बारिश के कारण स्कूल में छुट्टी का इंतजार करना, कई सारी यादें ताजा कराने आया,
मैं बरसात.....
कहीं आफत बनकर जलप्रलय का कहर बरसाया, तो कहीं सूखी बंजर ज़मीन पे हरियाली लाया, कहीं खेतों में अन्न की बुवाई लाया,
मैं बरसात.....
हरीभरी सौगाते लाया, त्योंहारो की बारात लाया,पूजा अर्चना का सौभाग्य लाया, सब जीव का जीवन स्तोत्र बना,
मैं बरसात.....
मेरी नजर से....






👍💐
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